टोंक में मेडिकल स्टोर पर नहीं मिल रहा मास्क, ढूंढना सबसे बड़ा टास्क; असुरक्षित महसूस कर रहे लोग


टोंक. कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को लेकर जहां केंद्र सरकार ने मास्क और सेनिटाइजर को जरुरी बताया हैं। लेकिन जिला मुख्यालय पर स्थिति उलट हैं कि यहां पर शहर के कई मेडिकल घूमने के बावजूद आमजन को मास्क नही मिल पा रहा हैं। लोगों का कहना हैं शहर में मास्क उपलब्ध नही होने से वह खूद को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं। वही शहर में मास्क की कमी के चलते जहां इसकी कालाबाजारी की होने की संभावना के बीच मेडिकल स्टोर संचालकों पर मास्क व सेनिटाइजर के मनमाने पैसे वसूलने के भी आरोप लग रहे हैं। हालांकि शहर में मास्क व सेनिटाइजर की अनुपलब्धता होने के कारण लोग एक मेडिकल स्टोर से  दूसरे मेडिकल स्टोर पर चक्कर लगा रहे हैं। पूर्व पार्षद प्रेमचंद साहू का कहना हैं कि शहर में कई केमिस्ट की दुकानों की खाक छानने के बावजूद मास्क नही मिल पा रहा हैं। वही कई मेडिकल स्टोर वाले लोगों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं। 



टोंक जिला केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहनलाल आहूजा ने बताया कि जब से कोरोना वायरस ने देश मे दस्तक दी हैं तब से शहर में मास्क मानों गायब से हो गए हो। उन्होंने दावा किया कि 99 प्रतिशत केमिस्ट की दुकानों पर मास्क ही नही हैं। हालांकि कुछ दुकानों पर सेनिटाइजर ज़रुर मिल जाएगा।। लोग मास्क व सेनिटाइजर खरीदने के लिए आ रहे हैं लेकिन जब मास्क स्टाक में ही उपलब्ध नही हैं तो लोगों को क्या दे। यहां तक कहा कि दो रुपए में मिलने वाला साधारण मास्क भी मेडिकल स्टोर पर नही हैं।  उन्होंने बताया कि जयपुर में मास्क लाते हैं लेकिन फिलहाल सप्लाई नही हो पा रही हैं। मेन्यूफेक्चरिंग कंपनियों पर ज्यादा से ज्यादा मास्क बनाने की उन्होंने सरकार से मांग की। 


300 रुपए में दो मास्क खरीदे 
कालीपलटन क्षेत्र निवासी अशरफ उर्फ वसीम ने बताया कि कुछ दिन पहले जब वह एक मेडिकल स्टोर से मास्क खरीदने गया। तो मास्क का दाम सुनकर हैरत में पड़ गया कि आखिर मास्क इतना महंगा कैसे हो गया। लेकिन मजबूरी के कारण बच्चों के लिए 300 रुपए में दो मास्क खरीदे। मेहंदीबाग क्षेत्र में केमिस्ट दुकानदार विकास विजयवर्गीय ने बताया कि शहर में किसी केमिस्ट की दुकान पर मास्क मौजूद ही नहीं हैं। ऐसे में कालाबाजारी का सवाल ही नहीं उठता हैं। उन्होंने बताया कि मास्क की बाहर से सप्लाई ही नही आ रही हैं।